आज स्मार्टफोन सिर्फ लग्जरी नहीं रहे।ये रोजमर्रा की जरूरत बन गए हैं।ऑनलाइन पढ़ाई, बैंकिंग और काम सब फोन पर निर्भर है।इसलिए कीमतों में बदलाव सीधे आम आदमी की जेब पर असर डालता है।बजट से पहले लोग इंतजार में हैं।क्या सरकार राहत देगी?यही सबसे बड़ा सवाल है।
भारतीय बाजार में कितना बढ़ा मुकाबला?
पिछले साल कई देसी स्मार्टफोन ब्रांड बाजार में उतरे।इनसे चीनी कंपनियों को कड़ी टक्कर मिली।कुछ कंपनियों ने कीमतें स्थिर रखीं।लेकिन सैमसंग जैसी कंपनियों ने कुछ मॉडल महंगे किए।इससे उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई।मुकाबले के बावजूद कीमत बढ़ने का डर बना हुआ है।
एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक AI की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ी है।इससे मेमोरी चिप्स की भारी कमी हो गई है।चिप्स की कमी से उत्पादन लागत बढ़ी है।ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव है।कंपनियों के लिए कीमतें संभालना मुश्किल हो रहा है।यही सबसे बड़ी चुनौती है।
कंपनियां कीमतें क्यों नहीं बढ़ाना चाहतीं?
स्मार्टफोन कंपनियां जानती हैं कि ज्यादा महंगे फोन बिकते नहीं हैं।भारत कीमत को लेकर संवेदनशील बाजार है।थोड़ी सी बढ़ोतरी भी डिमांड घटा सकती है।Nxtquantum Shift Technologies के फाउंडर माधव सेठ ने कहा कि टेक सेक्टर नाजुक दौर में है।AI फीचर्स से लागत बढ़ी है।लेकिन ग्राहकों को बनाए रखना जरूरी है।
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्यों जरूरी?
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को सिर्फ असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहिए।कैमरा मॉड्यूल, बैटरी और सर्किट बोर्ड देश में बनने चाहिए।इससे आयात घटेगा।लागत पर नियंत्रण होगा।रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा देना जरूरी है।यही स्थायी समाधान है।
बजट 2026 से क्या उम्मीद?
इंडस्ट्री को उम्मीद है कि सरकार टैक्स राहत देगी।अगर टारगेटेड इंसेंटिव मिले।तो घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी।लागत घटेगी।कीमतें स्थिर रह सकती हैं।कुछ स्मार्टफोन सस्ते भी हो सकते हैं।हालांकि बड़ी कटौती की संभावना कम है।अब नजर बजट के फैसलों पर है।

























