केंद्र सरकार का मानना है कि बांग्लादेश का रुख बदल रहा है।भारत विरोधी संकेत लगातार सामने आए हैं।पाकिस्तान और चीन से नजदीकियां बढ़ी हैं।इसी पृष्ठभूमि में बजट में फैसला लिया गया।बांग्लादेश को मिलने वाली सहायता आधी कर दी गई।यह सिर्फ आर्थिक नहीं राजनीतिक संकेत है।भारत ने नाराज़गी खुलकर दिखाई है।
बजट में कितनी मदद घटाई गई?
बजट 2026-27 में बांग्लादेश को केवल 600 मिलियन रुपये दिए गए हैं।पिछले साल यह राशि 1200 मिलियन रुपये थी।यानी सीधे 50 प्रतिशत की कटौती हुई है।यह कटौती अचानक नहीं मानी जा रही।कूटनीतिक तनाव पहले से चल रहा था।भारत ने अब इसे बजट में उतार दिया।संदेश साफ और सीधा है।
अल्पसंख्यकों का मुद्दा कितना अहम रहा?
भारत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर चिंतित है।हिंदू समुदाय पर हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं।घरों और पूजा स्थलों को निशाना बनाया गया।विदेश मंत्रालय लगातार निगरानी की बात कहता रहा है।राज्यसभा में भी यह मुद्दा उठा।भारत ने कई स्तरों पर आपत्ति जताई।लेकिन ढाका की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं दिखी।
यूनुस सरकार से भारत क्यों खफा है?
शेख हसीना सरकार के पतन के बाद हालात बदले।मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी।भारत को उम्मीद थी कि हालात सुधरेंगे।लेकिन हिंसा की घटनाओं को निजी विवाद बताया गया।भारत ने इसे खतरनाक रुख माना।इससे कट्टरपंथ को बढ़ावा मिलने का आरोप है।यही असंतोष अब बजट फैसले में दिखा।
पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकी क्यों चौंकाती है?
1971 की जंग के बावजूद ढाका और इस्लामाबाद करीब आए हैं।यूनुस ने पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की।वीजा मुक्त यात्रा पर चर्चा हुई।सीधी उड़ानें फिर शुरू हो गईं।14 साल बाद ढाका कराची फ्लाइट चली।व्यापार और निवेश आयोग बनाने पर सहमति बनी।भारत इसे रणनीतिक बदलाव मान रहा है।
चाबहार परियोजना से भारत क्यों पीछे हटा?
इस बजट में चाबहार बंदरगाह के लिए फंड नहीं रखा गया।पहले हर साल करीब एक अरब रुपये दिए जाते थे।ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध बड़ी वजह मानी जा रही है।छूट की अवधि अप्रैल 2026 में खत्म हो रही है।चाबहार भारत के लिए अहम रास्ता है।लेकिन भू-राजनीतिक दबाव हावी है।फिलहाल फंडिंग रोक दी गई है।
भूटान को सबसे ज्यादा फायदा क्यों मिला?
भूटान को 2289 करोड़ रुपये दिए गए हैं।यह पिछले साल से ज्यादा है।नेपाल को 800 करोड़ रुपये मिले हैं।मालदीव और मॉरीशस को 550 करोड़ रुपये दिए गए।कुल विदेशी सहायता 5685 करोड़ रुपये है।भारत भरोसेमंद साझेदारों को तरजीह दे रहा है।सौरभ द्विवेदी की नजर में यह बजट कूटनीति का साफ संदेश है।

























