अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील हो गई है। ट्रंप के मुताबिक टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए गए। बदले में भारत रूसी तेल खरीद बंद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अमेरिकी तेल ज्यादा खरीदेगा। ट्रंप ने इसे यूक्रेन युद्ध खत्म करने की दिशा में कदम बताया। इस बयान से वैश्विक हलचल तेज हो गई।
क्रेमलिन ने तुरंत क्या जवाब दिया?
रूस की तरफ से ट्रंप के दावे पर ठंडी प्रतिक्रिया आई। क्रेमलिन के प्रवक्ता Dmitry Peskov ने साफ कहा कि भारत की ओर से ऐसी कोई सूचना नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि मॉस्को को कोई आधिकारिक संदेश प्राप्त नहीं हुआ। रूस ने ट्रंप के बयान को केवल सोशल मीडिया पोस्ट बताया। क्रेमलिन ने पुष्टि के लिए औपचारिक जानकारी का इंतजार करने की बात कही। इससे ट्रंप के दावे पर सवाल खड़े हो गए।
भारत की तरफ से क्या कहा गया?
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने टैरिफ कटौती का स्वागत किया है। उन्होंने इसे भारतीय निर्यातकों के लिए राहत बताया। लेकिन रूसी तेल को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया। भारत सरकार ने इस मुद्दे पर चुप्पी रखी है। इससे संकेत मिलता है कि तेल पर फैसला अभी तय नहीं है। भारत ने केवल व्यापारिक लाभ की पुष्टि की है। ऊर्जा नीति पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई।
रूस-भारत रिश्तों पर क्रेमलिन का रुख क्या है?
क्रेमलिन ने भारत को एक अहम रणनीतिक साझेदार बताया। पेस्कोव ने कहा कि भारत एक संप्रभु देश है। वह अपने हितों के अनुसार फैसले करता है। रूस भारत के साथ रिश्ते मजबूत रखना चाहता है। मॉस्को किसी जल्दबाजी में निष्कर्ष नहीं निकालना चाहता। रूस ने संतुलित भाषा का इस्तेमाल किया। यह बयान रिश्तों में सावधानी दिखाता है।
रूसी तेल भारत के लिए क्यों अहम है?
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूसी तेल आयात बढ़ाया था। रूस से मिलने वाला तेल सस्ता है। इससे भारत में ईंधन कीमतें नियंत्रित रहती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अचानक तेल बंद करना मुश्किल होगा। इससे महंगाई बढ़ सकती है। ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि भारत सोच-समझकर कदम उठा रहा है।
ट्रेड डील का बाजार पर क्या असर दिखा?
टैरिफ कटौती की खबर से भारतीय बाजारों में तेजी आई। टेक्सटाइल जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर में उछाल देखा गया। निर्यातकों को राहत की उम्मीद बनी। निवेशकों ने इसे सकारात्मक संकेत माना। हालांकि ऊर्जा सेक्टर में अनिश्चितता बनी रही। तेल नीति पर स्पष्टता का इंतजार है। बाजार संतुलन की स्थिति में दिखा।
आगे तस्वीर कैसी बनती दिख रही है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत संतुलन बनाए रखना चाहता है। रूस भी आधिकारिक रुख का इंतजार कर रहा है। ऊर्जा और व्यापार दोनों मुद्दे जुड़े हैं। आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत बढ़ेगी। यह घटनाक्रम वैश्विक राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।

























