पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान व्यवस्थाओं को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया। केंद्र सरकार ने मामले को गंभीर मानते हुए बंगाल सरकार से तुरंत विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
क्या राष्ट्रपति दौरे में हुई गंभीर गड़बड़ी?
दार्जिलिंग जिले में संथाल समुदाय से जुड़ा एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था।इस कार्यक्रम में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंची थीं।लेकिन दौरे के दौरान हुई कुछ घटनाओं ने सियासत को गर्म कर दिया।बताया जा रहा है कि आखिरी समय पर कार्यक्रम का स्थान बदल दिया गया था।इस वजह से कई व्यवस्थाएं ठीक तरह से नहीं हो सकीं।कुछ अधिकारियों ने इसे बड़ी प्रशासनिक चूक बताया है।इसी कारण यह मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
क्या दिल्ली ने तुरंत रिपोर्ट मांगी?
इस घटना के बाद केंद्र सरकार तुरंत सक्रिय हो गई।गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से पूरी जानकारी मांगी है।उन्हें इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है।मंत्रालय ने पूछा है कि प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं हुआ।राष्ट्रपति के दौरे के रास्ते और सुरक्षा की जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई।इसके साथ कार्यक्रम स्थल बदलने की वजह भी पूछी गई है।केंद्र इस मामले को बेहद गंभीरता से देख रहा है।
क्या राष्ट्रपति ने भी जताई नाराजगी?
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की।उन्होंने कहा कि पहले तय किया गया स्थान अचानक बदल दिया गया।नया स्थान छोटा था इसलिए बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम तक नहीं पहुंच सके।उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को छोटी बहन कहकर संबोधित किया।फिर पूछा कि क्या वे उनसे नाराज हैं।क्योंकि स्वागत के लिए कोई बड़ा नेता या मंत्री मौजूद नहीं था।यह बात भी अब राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गई है।
क्या व्यवस्थाओं में सामने आईं कमियां?
सूत्रों के मुताबिक कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में कई कमियां देखी गईं।राष्ट्रपति के लिए तैयार किया गया वॉशरूम भी ठीक से तैयार नहीं था।बताया गया कि वहां पानी की व्यवस्था भी ठीक नहीं थी।रास्ते की सफाई को लेकर भी सवाल उठे हैं।कहा जा रहा है कि कुछ जगहों पर कचरा पड़ा हुआ था।इस मामले में स्थानीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा रही है।दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी के प्रशासनिक अधिकारियों के नाम भी चर्चा में हैं।
क्या अमित शाह ने किया तीखा हमला?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखकर टीएमसी सरकार को निशाना बनाया।शाह ने कहा कि यह घटना लोकतंत्र के लिए दुखद है।उनके अनुसार राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद का अपमान हुआ है।उन्होंने कहा कि यह सरकार की प्रशासनिक विफलता को दिखाता है।शाह ने दावा किया कि इससे देश के लोग भी आहत हुए हैं।इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया।
क्या ममता बनर्जी ने दिया जवाब?
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रपति का पूरा सम्मान करती हैं।लेकिन हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं होता।ममता ने बताया कि उस समय वे एक धरने में शामिल थीं।उनके मुताबिक इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की जानकारी राज्य सरकार को पहले नहीं दी गई थी।उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के दौरे की जानकारी मिलती रहती है।लेकिन इस कार्यक्रम के आयोजन से राज्य सरकार जुड़ी नहीं थी।
क्या अब बढ़ेगा केंद्र राज्य टकराव?
यह विवाद अब सिर्फ प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं रहा।इसने केंद्र और राज्य की राजनीति को भी गरमा दिया है।दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।केंद्र का कहना है कि यह संवैधानिक पद का अपमान है।जबकि बंगाल सरकार इन आरोपों को गलत बता रही है।अब सबकी नजर उस रिपोर्ट पर टिकी है जो दिल्ली भेजी जाएगी।रिपोर्ट आने के बाद ही इस विवाद की आगे की दिशा तय होगी।

























