भारत सरकार ने विदेशी निवेश से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश के नियम आसान कर दिए हैं। पहले ऐसे निवेश के लिए सरकार से मंजूरी जरूरी होती थी। अब कई मामलों में यह प्रक्रिया सरल हो जाएगी। यह फैसला 10 मार्च 2026 को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। सरकार को उम्मीद है कि इससे भारत में निवेश बढ़ेगा। इससे उद्योग और कारोबार को भी नई गति मिल सकती है।
गलवान के बाद क्या नियम बने
साल 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच तनाव हुआ था। इसके बाद भारत ने एक खास नियम लागू किया था। इसे प्रेस नोट 3 कहा गया। इस नियम के तहत भारत से लगती सीमा वाले देशों के निवेश पर सख्त निगरानी रखी गई। चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान इसके दायरे में आए। इन देशों से आने वाले किसी भी निवेश के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी थी। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया था।
अब क्या होगा नया असर
नए फैसले के बाद निवेश की प्रक्रिया आसान हो सकती है। पड़ोसी देशों से जुड़े शेयरधारकों वाली कंपनियां अब कई क्षेत्रों में निवेश कर सकेंगी। कई मामलों में उन्हें पहले की तरह अनिवार्य सरकारी अनुमति नहीं लेनी होगी। इससे विदेशी कंपनियों के लिए भारत का बाजार ज्यादा खुला दिखेगा। उद्योग जगत को उम्मीद है कि इससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि सरकार ने संकेत दिया है कि संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बनी रहेगी। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सेक्टर पर नजर रखी जाएगी।
चीन का निवेश कितना रहा
दिलचस्प बात यह है कि भारत में चीन का निवेश अभी भी बहुत कम है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक चीन ने भारत में करीब 2.51 अरब डॉलर निवेश किया। यह भारत के कुल एफडीआई का लगभग 0.32 प्रतिशत है। निवेश के मामले में चीन का स्थान भी बहुत नीचे है। वह निवेशकों की सूची में लगभग 23वें स्थान पर आता है। गलवान के बाद भारत ने कई चीनी ऐप्स पर भी रोक लगाई थी। टिकटॉक और वीचैट जैसे ऐप भारत में बंद कर दिए गए थे।
व्यापार में रिश्ता क्यों मजबूत
राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत और चीन के बीच व्यापार मजबूत बना हुआ है। चीन आज भी भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में चीन से भारत का आयात काफी बढ़ गया। यह लगभग 113.45 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं भारत का निर्यात घटकर लगभग 14.25 अरब डॉलर रह गया। इस कारण व्यापार घाटा बहुत ज्यादा बढ़ गया। भारत का व्यापार घाटा करीब 99.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
अर्थव्यवस्था पर क्या असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि निवेश के नियम आसान होने से अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है। विदेशी निवेश से उद्योगों को पूंजी मिलती है। इससे नई तकनीक भी आती है और रोजगार बढ़ते हैं। भारत अभी विनिर्माण और बुनियादी ढांचे पर जोर दे रहा है। ऐसे में ज्यादा निवेश आने से उद्योगों को गति मिल सकती है। सरकार भी चाहती है कि भारत वैश्विक निवेश का बड़ा केंद्र बने। इसलिए नीतियों को धीरे-धीरे आसान बनाया जा रहा है।
आगे क्या होगा असर
यह फैसला भारत की आर्थिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार एक तरफ निवेश बढ़ाना चाहती है। दूसरी तरफ सुरक्षा को भी नजर में रख रही है। इसलिए कुछ क्षेत्रों में निगरानी जारी रह सकती है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि विदेशी कंपनियां इस फैसले पर कैसे प्रतिक्रिया देती हैं। अगर निवेश बढ़ता है तो भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिल सकता है। यही वजह है कि यह फैसला नीति के स्तर पर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

























