पिछले कुछ सालों में पंजाब की सिंचाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव दिखा है। पहले ज्यादातर किसान ट्यूबवेल के भरोसे खेती करते थे। जमीन के नीचे का पानी तेजी से घट रहा था। सरकार ने पुरानी नहरों को ठीक करना शुरू किया। मौसमी दरियाओं और चोओं का पानी खेतों तक लाने की कोशिश हुई। अब कहा जा रहा है कि करीब दस हजार क्यूसेक अतिरिक्त पानी खेती में इस्तेमाल हो रहा है। कई साल से बंद पड़ी नहरें फिर बहने लगी हैं। इससे खेती को नई उम्मीद मिली है।
क्या खेतों तक पहुंचा ज्यादा पानी?
कुछ साल पहले तक पंजाब में सिर्फ करीब 26.5 प्रतिशत खेतों तक ही नहर का पानी पहुंचता था। बाकी किसान जमीन के नीचे के पानी पर निर्भर थे। अब यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। सरकार का दावा है कि अब लगभग 78 प्रतिशत खेतों तक नहर का पानी पहुंच रहा है। करीब 58 लाख एकड़ जमीन तक यह पानी जा रहा है। यह पहले के मुकाबले लगभग तीन गुना बढ़ोतरी है। इससे भूजल पर दबाव कम होने की उम्मीद है। विशेषज्ञ इसे खेती को बचाने वाला कदम मान रहे हैं।
क्या बड़े स्तर पर काम हुआ?
सिंचाई व्यवस्था को सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया गया। अप्रैल 2022 से अब तक लगभग 6700 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह पैसा नहरों की मरम्मत और लाइनिंग में लगाया गया। करीब 13 हजार किलोमीटर लंबी नहरों को सुधारा गया। साथ ही करीब सात हजार छोटी पानी वाली चैनलों को भी दोबारा चालू किया गया। हजारों वॉटरकोर्स की सफाई की गई। इससे पानी खेतों के आखिरी छोर तक पहुंचने लगा है।
क्या पुरानी नहरें फिर जिंदा?
कई ऐसी नहरें थीं जो दशकों से बंद पड़ी थीं। सरकार के मुताबिक करीब 101 नहरों को फिर से चालू किया गया। इनकी कुल लंबाई करीब 545 किलोमीटर बताई जा रही है। कई नहरें 30 से 40 साल से सूखी थीं। कुछ पूरी तरह मिट्टी में दब चुकी थीं। इंजीनियरों ने उन्हें फिर खोदकर बहाल किया। खास बात यह रही कि इसके लिए नई जमीन भी नहीं लेनी पड़ी। इससे नए इलाके भी सिंचाई में शामिल हो गए।
क्या सरहाली नहर की कहानी खास?
तरनतारन जिले की सरहाली माइनर नहर इसका बड़ा उदाहरण है। यह करीब 22 किलोमीटर लंबी नहर है। पिछले कई सालों में यह पूरी तरह गायब हो चुकी थी। जब इंजीनियरों ने काम शुरू किया तो नहर मिट्टी के नीचे दब चुकी थी। इलाके के लोग भी इसे लगभग भूल चुके थे। सफाई और मरम्मत के बाद इसे फिर चालू किया गया। अब यह आसपास के खेतों तक पानी पहुंचा रही है। यह दिखाता है कि पुरानी व्यवस्था को फिर जिंदा किया जा सकता है।
क्या बड़ी नहरों को सुधारा?
सरकार ने बड़ी नहरों पर भी ध्यान दिया है। फिरोजपुर फीडर नहर की क्षमता बढ़ाई गई। सिरहिंद नहर को भी लंबे समय बाद अपग्रेड किया गया। मालवा इलाके के लिए यह नहर बहुत अहम मानी जाती है। पहले यहां पानी कम आता था। किसानों को बारी से पानी मिलता था। अब कई जगह पानी ज्यादा नियमित मिलने लगा है। इससे खेती की लागत भी कुछ कम होने की उम्मीद है।
क्या किसानों को होगा फायदा?
नहरों के पानी से हजारों गांवों को फायदा मिलने लगा है। करीब 1400 गांव ऐसे हैं जिन्हें आजादी के बाद पहली बार नहर का पानी मिला। कई किसानों ने दशकों से नहर का पानी नहीं देखा था। अब ट्यूबवेल पर निर्भरता कम होने लगेगी। इससे जमीन के नीचे का पानी बच सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि नहर का पानी मिट्टी के लिए भी अच्छा होता है। इसमें प्राकृतिक खनिज होते हैं। इससे मिट्टी की ताकत बढ़ती है और भविष्य में पैदावार बेहतर हो सकती है।

























