होर्मुज स्ट्रेट अब सिर्फ रास्ता नहीं रहा।यह अब तनाव का केंद्र बन गया है।रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान जहाजों से पैसे मांग रहा है।कुछ जहाजों से भारी रकम ली जा रही है।यह रकम करीब 20 लाख डॉलर बताई जा रही है।भारतीय रुपए में यह करीब 18 करोड़ होती है।इससे व्यापार करने वाले देश चिंतित हैं।
क्यों बढ़ा अचानक इतना तनाव
इस पूरे मामले की जड़ में पश्चिम एशिया का तनाव है।ईरान का कहना है कि युद्ध के हालात हैं।खर्च बढ़ गया है इसलिए शुल्क लिया जा रहा है।ईरानी नेताओं ने इसे जायज ठहराया है।उनका कहना है कि यह उनका इलाका है।इसलिए नियम वही तय करेंगे।यही बात दुनिया को चुभ रही है।
क्या सच में ईरान का हक
ईरान का दावा है कि यह उसका रणनीतिक क्षेत्र है।वह यहां नियंत्रण रखता है।लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून कुछ और कहता है।यह रास्ता दुनिया के लिए खुला माना जाता है।यही कारण है कि विवाद बढ़ गया है।कई देश इसे गलत मान रहे हैं।समुद्री आजादी पर सवाल उठ रहे हैं।
दुनिया के तेल पर असर
होर्मुज स्ट्रेट बहुत अहम है।दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल यहीं से गुजरता है।इसके साथ एलएनजी भी इसी रास्ते से जाती है।अगर यहां रुकावट आती है तो असर बड़ा होता है।तेल की कीमतें बढ़ने लगती हैं।मार्केट में अस्थिरता आती है।अब यही होने लगा है।
क्या सभी जहाजों पर एक नियम
ईरान सभी जहाजों को नहीं रोक रहा है।कुछ देशों को छूट दी जा रही है।भारत के एलपीजी जहाजों को जाने दिया गया है।एक पाकिस्तानी जहाज भी गुजर चुका है।इससे साफ है कि नीति एक जैसी नहीं है।राजनीतिक रिश्ते भी असर डाल रहे हैं।यही स्थिति को और जटिल बना रही है।
अमेरिका की चेतावनी क्या कहती
अमेरिका ने इस मामले पर सख्त रुख लिया है।राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है।उन्होंने कहा कि रास्ता 48 घंटे में खोलो।नहीं तो जवाब मिलेगा।इस बयान के बाद तनाव और बढ़ गया है।दोनों देश आमने सामने दिख रहे हैं।दुनिया की नजर अब इसी पर है।
क्या आगे और बिगड़ सकते हालात
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी बयान दिया है।उन्होंने कहा कि अगर हमला हुआ तो रास्ता बंद होगा।अगर ऐसा हुआ तो संकट और गहरा जाएगा।तेल सप्लाई रुक सकती है।दुनिया में कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।युद्ध जैसे हालात बन सकते हैं।अभी स्थिति बेहद नाजुक है।

























