एक नई ऊर्जा दिखाई दे रही है। ‘खेल क्रांति’ के तहत सरकार बड़े स्तर पर बदलाव कर रही है। युवाओं के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं। अब खेलों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका असर पूरे राज्य में साफ नजर आने लगा है। सरकार ने खेल बजट में बड़ा इजाफा किया है। यह ₹350 करोड़ से बढ़कर ₹1791 करोड़ हो गया है। इससे खेल ढांचे को मजबूती मिल रही है। कोचों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। यह सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।
अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी
पंजाब पहली बार हॉकी एशियन चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी करेगा। इससे राज्य को वैश्विक पहचान मिलेगी। इसके अलावा फोर नेशन टूर्नामेंट भी आयोजित होगा। ये मुकाबले मोहाली और जालंधर में होंगे। इससे पंजाब की छवि और मजबूत होगी।
बैडमिंटन चैंपियनशिप की वापसी
करीब 40 साल बाद पंजाब में बैडमिंटन चैंपियनशिप आयोजित की जा रही है। यह अंडर-13 वर्ग के खिलाड़ियों के लिए होगी। इससे युवा खिलाड़ियों को आगे आने का मौका मिलेगा। खेल संस्कृति को यह नई ताकत देगा। इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
खेल ढांचे का तेजी से विकास
सरकार 3100 खेल मैदान तैयार कर रही है। इसके साथ 3000 जिम भी बनाए जा रहे हैं। खिलाड़ियों को बड़ी संख्या में स्पोर्ट्स किट दी जा रही हैं। ये कदम जमीनी स्तर को मजबूत बना रहे हैं। इससे भविष्य के खिलाड़ी तैयार होंगे।
खिलाड़ियों के लिए बढ़ी आर्थिक मदद
सरकार खिलाड़ियों को सीधे आर्थिक सहयोग दे रही है। ओलंपिक की तैयारी के लिए ₹15 लाख दिए जाते हैं। एशियन गेम्स के लिए ₹8 लाख की सहायता मिलती है। पदक जीतने वालों को ₹1 करोड़ तक इनाम मिलता है। इससे युवा खेलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
पंजाब की खेल विरासत प्रेरणा बनी
पंजाब हमेशा से खिलाड़ियों की धरती रहा है। हॉकी से लेकर क्रिकेट तक खिलाड़ी दुनिया में चमके हैं। कई ओलंपिक पदक विजेता पंजाब से आए हैं। यह विरासत नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही है। सरकार इसे आगे बढ़ाने में जुटी है।
नशे के खिलाफ खेल बना हथियार
सरकार खेलों को नशे के खिलाफ एक मजबूत हथियार बना रही है। युवाओं को खेलों से जोड़ा जा रहा है। इससे उनकी ऊर्जा सही दिशा में लगती है। खेल सामाजिक बदलाव का जरिया बन रहे हैं। इससे राज्य और स्वस्थ बनेगा।

























