लगातार हमलों के बावजूद ईरान की मिसाइल क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उसकी करीब 50 प्रतिशत ताकत अब भी बरकरार है। यही वजह है कि तेहरान अभी भी मजबूत जवाब देने में सक्षम है। इससे साफ होता है कि ईरान ने वर्षों से अपने मिसाइल कार्यक्रम पर गंभीर निवेश किया है।
क्या मिसाइलों ने युद्ध का समीकरण बदल दिया है?
ईरान की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों ने आधुनिक युद्ध की तस्वीर बदल दी है। अब पारंपरिक सेना के साथ-साथ मिसाइल और ड्रोन तकनीक ही असली ताकत बन गई है। ईरान ने यह दिखा दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी ताकतों को चुनौती दी जा सकती है।
क्या एयर डिफेंस सिस्टम दबाव में हैं?
अमेरिका और इजरायल के उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम भी ईरान की मिसाइलों को पूरी तरह रोक नहीं पा रहे हैं। थाड, आयरन डोम और पैट्रियट जैसे सिस्टम लगातार दबाव झेल रहे हैं। इससे यह साफ है कि मिसाइल तकनीक ने सुरक्षा व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
क्या ईरान की रणनीति बदली है?
ईरान ने पारंपरिक वायुसेना की कमी को मिसाइल और ड्रोन के जरिए पूरा किया है। उसने अपने हथियारों का इस्तेमाल सिर्फ हमले के लिए नहीं, बल्कि रणनीतिक दबाव बनाने के लिए भी किया है। यही कारण है कि वह लंबे समय तक संघर्ष को जारी रखने में सक्षम दिख रहा है।
क्या ईरान के पास बड़ा मिसाइल भंडार है?
अनुमान है कि ईरान के पास हजारों बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा है। इसे मध्य पूर्व में सबसे बड़ा और विविध मिसाइल स्टॉक माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में उसने अपनी मिसाइलों की सटीकता और मारक क्षमता को काफी बढ़ाया है।
क्या हाइपरसोनिक मिसाइलें गेम चेंजर हैं?
ईरान के पास मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ हाइपरसोनिक मिसाइलें भी हैं। ये बेहद तेज गति से लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हैं। इनकी वजह से क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर गहरा असर पड़ा है।
क्या युद्ध लंबा खिंच सकता है?
मौजूदा हालात को देखते हुए यह संकेत मिल रहे हैं कि यह संघर्ष जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। ईरान की बची हुई ताकत उसे लंबे समय तक लड़ने की क्षमता देती है। इससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है।

























