ईरान का साउथ पार्स गैस प्रोजेक्ट बहुत बड़ा है। यह देश की ऊर्जा की रीढ़ माना जाता है। यहां से करीब सत्तर प्रतिशत गैस मिलती है। इससे घरों और उद्योगों को ऊर्जा मिलती है। इसी से सरकार को बड़ा राजस्व मिलता है। अगर यह ठप होता है तो देश की हालत कमजोर हो जाती है। इसलिए इस पर हमला बड़ा झटका माना जा रहा है।
हमला कैसे हुआ और क्या नुकसान?
रिपोर्ट के अनुसार इजरायल ने अचानक हमला किया। निशाना रिफाइनरी और पाइपलाइन नेटवर्क रहे। शुरुआती जानकारी में भारी नुकसान की बात सामने आई। गैस उत्पादन प्रभावित हुआ है। बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। उद्योगों की रफ्तार धीमी हो सकती है। इस नुकसान को ठीक करने में लंबा समय लग सकता है।
क्या अमेरिका को इसकी जानकारी थी?
इस हमले के बाद बड़ा सवाल उठ रहा है। क्या अमेरिका को इसकी जानकारी थी या नहीं। पहले संकेत दिए गए थे कि ऊर्जा ठिकानों को निशाना नहीं बनाया जाएगा। लेकिन इस कार्रवाई ने उन बातों पर सवाल खड़े कर दिए। अब लोग इसे बड़ी रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। कूटनीतिक हल और मुश्किल दिख रहा है।
इजरायल का दावा क्या कहता है?
इजरायल ने अपने हमले को सही ठहराया है। उसका कहना है कि ईरान गैस से कमाई का इस्तेमाल करता है। वह उन संगठनों को मदद देता है जो उसके खिलाफ हैं। इसलिए आर्थिक स्रोत को निशाना बनाया गया। यह रणनीतिक कदम बताया जा रहा है। लेकिन इससे तनाव और बढ़ गया है।
ईरान की चेतावनी कितनी गंभीर?
ईरान ने पहले ही साफ कर दिया था। अगर उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ तो जवाब मिलेगा। अब यह हमला हो चुका है। ऐसे में जवाबी कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है। हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। सीधी सैन्य टक्कर का खतरा बढ़ रहा है। इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता आ सकती है।
दुनिया पर इसका क्या असर पड़ेगा?
इस घटना का असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। तेल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं। साउथ पार्स फारस की खाड़ी के पास है। होर्मुज जलडमरूमध्य भी नजदीक है। यह दुनिया का अहम व्यापार मार्ग है। अगर यहां तनाव बढ़ा तो सप्लाई प्रभावित होगी। इससे वैश्विक बाजार में हलचल होगी।
भारत समेत देशों पर क्या असर?
भारत जैसे देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं। रसोई गैस के दाम भी बढ़ सकते हैं। आम लोगों पर बोझ बढ़ेगा। सरकारों के लिए भी चुनौती बढ़ेगी। अगर हालात और बिगड़े तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर दिखेगा। फिलहाल दुनिया की नजर इसी तनाव पर टिकी है।

























