वेस्ट एशिया में 40 दिन की जंग के बाद सीजफायर हुआ। हालात थोड़े शांत दिख रहे हैं। लेकिन जमीन पर तस्वीर पूरी तरह नहीं बदली। भारतीय नौसेना अब भी अलर्ट पर है। हॉर्मुज स्ट्रेट में तैनाती पहले जैसी है। सुरक्षा प्रोटोकॉल भी वही रखा गया है। किसी तरह की ढील नहीं दी गई है।
क्या जहाजों की आवाजाही जारी?
सीजफायर के बाद जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो रही है। पहली खेप में 5 से 6 भारतीय जहाज पार हो सकते हैं। इसके लिए लगातार बातचीत चल रही है। क्रू और स्थानीय पक्षों से संपर्क हो रहा है। अब तक 9 भारतीय जहाज सुरक्षित पार कर चुके हैं। पहले यहां 25 जहाज मौजूद थे। धीरे-धीरे सभी को निकाला जा रहा है।
क्या नेवी की रणनीति वही रही?
नेवी की रणनीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। जहाजों को पहले की तरह मदद मिल रही है। नेविगेशन में सहायता दी जा रही है। फिर उन्हें सुरक्षित जगह तक एस्कॉर्ट किया जा रहा है। यही प्रक्रिया अभी भी जारी है। जोखिम कम नहीं हुआ है। इसलिए सतर्कता बनाए रखी गई है।
क्या IFCIOR क्या भूमिका निभा रहा?
IFCIOR इस पूरे ऑपरेशन का अहम हिस्सा है। यह गुरुग्राम में स्थित है। यहां से पूरे इलाके की निगरानी हो रही है। समुद्री ट्रैफिक पर नजर रखी जा रही है। कई देशों के अधिकारी भी यहां तैनात हैं। यह एक बड़ा सुरक्षा नेटवर्क है।
क्या कितनी घटनाएं सामने आईं?
IFCIOR की रिपोर्ट में कई घटनाएं दर्ज की गई हैं। फारस की खाड़ी से लेकर ओमान तक कुल 30 घटनाएं सामने आईं। इनमें 23 जहाजों को नुकसान पहुंचा। दिन और रात दोनों समय हमले हुए। मिसाइल और ड्रोन हमले भी शामिल हैं। कई अज्ञात हमले भी दर्ज किए गए। यह स्थिति की गंभीरता दिखाता है।
क्या जानमाल का नुकसान हुआ?
इन घटनाओं में लोगों की जान भी गई है। रिपोर्ट के अनुसार 10 लोगों की मौत हुई। कई जहाजों को नुकसान हुआ। समुद्री रास्ता अब भी जोखिम भरा है। इसलिए सुरक्षा को लेकर कोई ढील नहीं दी जा रही। हर कदम सोच समझकर उठाया जा रहा है।
क्या आगे क्या रणनीति होगी?
फिलहाल नेवी स्थिति पर नजर रखे हुए है। सीजफायर स्थायी होगा या नहीं, यह साफ नहीं है। इसलिए तैनाती में बदलाव नहीं किया गया। आने वाले दिनों में हालात के अनुसार फैसला होगा। भारत अपने जहाजों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। यही रणनीति आगे भी जारी रहेगी।

























