मध्य पूर्व में लंबे संघर्ष के बाद United States, Israel और Iran के बीच 10 सूत्रीय समझौते के तहत युद्धविराम लागू हुआ। इस घोषणा के साथ ही वैश्विक बाजारों में राहत का माहौल दिखा। लेकिन कुछ ही घंटों में हालात बदल गए और सीजफायर पर सवाल खड़े होने लगे। यह संकेत मिलने लगा कि समझौता उतना मजबूत नहीं था जितना दिख रहा था।
क्या लेबनान पर हमले ने बिगाड़ी स्थिति?
सीजफायर की घोषणा के बाद रात होते-होते Israel ने Lebanon में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। राजधानी बेरूत के रिहायशी और कारोबारी इलाकों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में करीब 200 लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की खबर सामने आई। इजराइल ने दावा किया कि यह कार्रवाई समझौते के दायरे से बाहर है, जिससे विवाद और गहरा गया।
क्या ईरान ने दिया सख्त जवाब?
हमलों के बाद Iran ने कड़ा रुख अपनाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। इस कदम से वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा मंडराने लगा। ईरान ने यह भी संकेत दिया कि वह यहां से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण बढ़ा सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ गया।
क्या खाड़ी देशों पर भी पड़ा असर?
तनाव बढ़ने का असर खाड़ी देशों पर भी साफ दिखा। United Arab Emirates, Qatar, Saudi Arabia और Kuwait जैसे देशों में हमलों और अलर्ट की स्थिति बनी रही। मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोका गया, जबकि कुछ जगहों पर बुनियादी ढांचे को नुकसान भी पहुंचा। इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई।
क्या बाजार और तेल कीमतों पर असर?
सीजफायर की खबर से पहले जहां बाजारों में तेजी आई थी, वहीं हालात बिगड़ते ही तस्वीर पलट गई। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद फिर उछाल देखने को मिला। वैश्विक शेयर बाजारों में भी दबाव बढ़ा। निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बन गया, जिससे आर्थिक असर भी साफ दिखाई देने लगा।
क्या अमेरिका और इजराइल का रुख सख्त?
Benjamin Netanyahu ने साफ किया कि जरूरत पड़ने पर कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं United States की ओर से भी होर्मुज खोलने की मांग की गई। अमेरिकी नेतृत्व के भीतर भी शर्तों को लेकर मतभेद नजर आए। इससे यह साफ हुआ कि कूटनीतिक स्तर पर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
क्या 24 घंटे में बदल गई पूरी तस्वीर?
सिर्फ 24 घंटे के भीतर जो घटनाक्रम सामने आया, उसने यह दिखा दिया कि सीजफायर बेहद नाजुक है। शांति की उम्मीद जरूर बनी हुई है, लेकिन जमीनी हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं।
























