इस्लामाबाद में बड़ी बैठक चल रही है। अमेरिका और ईरान आमने सामने हैं। माहौल गंभीर है। बातचीत लंबी खिंच रही है। मिडिल ईस्ट का युद्ध दांव पर है। 40 दिन की लड़ाई ने हालात बिगाड़े हैं। दुनिया की नजर इसी बातचीत पर टिकी है।
ईरान ने कौन सी शर्तें रखीं?
ईरान साफ लाइन खींच चुका है। पहली शर्त है लेबनान में युद्धविराम। दूसरी शर्त है प्रतिबंध हटाना। ईरान चाहता है उसका पैसा वापस मिले। फ्रीज संपत्तियां रिलीज हों। बिना इन शर्तों के बात नहीं होगी। यह उसका साफ संदेश है।
ट्रंप क्यों नहीं झुक रहे?
Donald Trump ने सख्त रुख अपनाया है। वह दबाव की नीति पर टिके हैं। अमेरिका कुछ राहत की बात करता है। लेकिन बदले में बड़ी मांग रखता है। परमाणु कार्यक्रम रोकने की शर्त है। मिसाइल ताकत घटाने की बात है। ट्रंप पीछे हटने को तैयार नहीं दिखते।
लेबनान मुद्दा कितना बड़ा?
Hezbollah पर हमले जारी हैं। इजराइल की कार्रवाई तेज है। हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका इसे अलग ऑपरेशन बताता है। लेकिन ईरान इसे उसी जंग का हिस्सा मानता है। यही टकराव का बड़ा कारण बन गया है।
पैसे और प्रतिबंध पर अड़चन क्यों?
ईरान की अर्थव्यवस्था दबाव में है। प्रतिबंधों ने नुकसान किया है। इसलिए वह पैसा चाहता है। अमेरिका कुछ राहत देने का संकेत देता है। लेकिन पूरी छूट नहीं देना चाहता। व्हाइट हाउस ने कई रिपोर्ट खारिज की हैं। इस मुद्दे पर अभी सहमति दूर है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों अहम?
Strait of Hormuz दुनिया की तेल सप्लाई का रास्ता है। ईरान यहां नियंत्रण चाहता है। वह जहाजों से टोल लेना चाहता है। अमेरिका इसे नहीं मानता। वह फ्री मूवमेंट चाहता है। यह टकराव बहुत संवेदनशील है।
परमाणु और सेना पर टकराव क्यों?
ईरान यूरेनियम संवर्धन जारी रखना चाहता है। अमेरिका इसका विरोध करता है। मिसाइल ताकत भी बड़ा मुद्दा है। अमेरिका और इजराइल कटौती चाहते हैं। ईरान तैयार नहीं है। साथ ही वह अमेरिकी सेना हटाने की मांग करता है। लेकिन ट्रंप ने साफ कहा है कि सेना बनी रहेगी।

























