स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय झंडे वाले एक जहाज पर फायरिंग की खबर ने दिल्ली को तुरंत सतर्क कर दिया. यह कोई साधारण घटना नहीं थी. यह उस रास्ते पर हुई जहां से दुनिया का बड़ा तेल कारोबार गुजरता है. इसलिए मामला सिर्फ एक जहाज तक सीमित नहीं रहा. भारत ने इसे सीधे समुद्री सुरक्षा से जुड़ा सवाल माना. सरकार ने साफ किया कि नागरिक जहाजों पर दबाव, धमकी या गोलीबारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यही वजह है कि नई दिल्ली ने इस पूरे मामले को गंभीर कूटनीतिक स्तर पर उठाया.
दिल्ली ने इतनी सख्ती क्यों?
भारत ने ईरान के राजदूत को तलब करके अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया. यह कदम दिखाता है कि मामला मामूली नहीं माना गया. विदेश मंत्रालय ने साफ संदेश दिया कि भारतीय जहाजों की सुरक्षा भारत की पहली जिम्मेदारी है. भारत यह भी जानना चाहता है कि जहाज पर फायरिंग किस आधार पर हुई. किसने आदेश दिया. किस स्थिति में ऐसा कदम उठाया गया. दिल्ली का रुख यह है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नियम से ऊपर कोई नहीं हो सकता.
जहाज बचा, पर सवाल बढ़े?
राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भारतीय क्रू सदस्य के घायल होने की खबर नहीं आई. लेकिन सिर्फ इतना कह देने से मामला हल्का नहीं हो जाता. जहाज को रास्ता बदलना पड़ा. यही बात खतरे की असली गहराई दिखाती है. जब कोई कारोबारी जहाज अपना मार्ग बदलता है, तो उसका मतलब होता है कि माहौल डर पैदा कर चुका है. इससे समय, लागत और जोखिम तीनों बढ़ते हैं. भारत की चिंता यहीं से और बड़ी हो जाती है.
समुद्री रास्ता इतना अहम क्यों?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में गिना जाता है. खाड़ी से निकलने वाला बड़ा तेल और गैस कारोबार इसी रास्ते से आगे बढ़ता है. अगर यहां तनाव बढ़ता है, तो असर केवल ईरान या भारत तक सीमित नहीं रहता. दुनिया के ऊर्जा बाजार तक इसकी लहर जाती है. तेल की कीमतें हिल सकती हैं. बीमा महंगा हो सकता है. माल ढुलाई धीमी पड़ सकती है. इसलिए होर्मुज में चली गोली, कई देशों की धड़कन बढ़ा देती है.
भारत अब क्या देख रहा?
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग और दूसरे संबंधित विभाग पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं. भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि क्षेत्र में मौजूद उसके जहाज और नाविक सुरक्षित रहें. जरूरत पड़ने पर रूट, एडवाइजरी और सुरक्षा प्रोटोकॉल बदले जा सकते हैं. सरकार का ध्यान सिर्फ इस एक घटना पर नहीं है. वह बड़े खतरे को भी पढ़ रही है. अगर तनाव लंबा चला, तो भारतीय व्यापारिक हित प्रभावित हो सकते हैं. इसलिए निगरानी अब और कड़ी रहने वाली है.
ईरान-अमेरिका तनाव से क्या जुड़ता?
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब क्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पहले से बना हुआ है. ऐसे माहौल में हर छोटी घटना जल्दी बड़ी बन जाती है. समुद्र में एक चेतावनी फायर भी कई बार कूटनीतिक संकट का रूप ले सकती है. भारत इसी खतरे को समझ रहा है. इसलिए उसने इंतजार नहीं किया. पहले विरोध दर्ज किया. फिर जवाब मांगा. और साथ ही यह संकेत भी दिया कि भारतीय हितों पर चोट हुई तो प्रतिक्रिया सीधी होगी.
आगे मामला किस ओर जाएगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान इस पर क्या जवाब देता है. क्या वह सफाई देगा. क्या जांच होगी. क्या भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने का भरोसा मिलेगा. भारत की कोशिश यही होगी कि मामला बिना और बिगड़े सुलझे, लेकिन सम्मान और सुरक्षा से समझौता किए बिना. इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि समुद्र सिर्फ व्यापार का रास्ता नहीं, ताकत की परीक्षा का मैदान भी है. और भारत ने बता दिया है कि उसके जहाज अकेले नहीं हैं.

























