केंद्र सरकार ने आधार ऐप को फोन में पहले से डालने के प्रस्ताव से पीछे हटने का फैसला किया है. यह वही प्रस्ताव था जिस पर लंबे समय से चर्चा चल रही थी. लेकिन कंपनियों के विरोध के बाद सरकार ने रुख बदल लिया. इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय ने इस पूरे मामले की समीक्षा की. इसके बाद साफ किया गया कि अब इसे अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा. यानी कंपनियों पर कोई दबाव नहीं रहेगा. यह फैसला अचानक जरूर लगा, लेकिन इसके पीछे लंबी प्रक्रिया रही है.
कंपनियों को राहत क्यों मिली?
Apple, Samsung और दूसरी बड़ी कंपनियां इस प्रस्ताव का लगातार विरोध कर रही थीं. उनका कहना था कि इससे उनके काम पर असर पड़ेगा. अब सरकार के फैसले से उन्हें सीधी राहत मिली है. कंपनियों को अब अपने फोन में जबरन कोई ऐप डालने की जरूरत नहीं होगी. इससे उनकी प्लानिंग आसान हो गई है. और उत्पादन में भी लचीलापन बना रहेगा. यही वजह है कि इस फैसले को इंडस्ट्री के लिए बड़ा सुकून माना जा रहा है.
UIDAI ने क्या साफ कहा?
UIDAI ने अपने बयान में कहा कि सरकार इस प्रस्ताव पर आगे नहीं बढ़ेगी. इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय ने सभी पक्षों से बात करने के बाद यह निर्णय लिया है. हालांकि बयान में यह नहीं बताया गया कि पीछे हटने की असली वजह क्या रही. लेकिन इतना जरूर साफ है कि कंपनियों की आपत्तियों को गंभीरता से लिया गया. सरकार ने संतुलन बनाने की कोशिश की है. ताकि नीति भी चले और उद्योग भी परेशान न हो.
बार-बार क्यों हो रहा था विरोध?
पिछले दो साल में यह छठी बार था जब सरकार ने किसी सरकारी ऐप को फोन में प्री-इंस्टॉल करने की बात की. हर बार कंपनियों ने इसका विरोध किया. उनका कहना था कि इससे उनके सिस्टम पर असर पड़ता है. हर बाजार के लिए अलग-अलग तैयारी करनी पड़ती है. और यह उनके बिजनेस मॉडल के खिलाफ है. इसलिए यह मुद्दा बार-बार अटकता रहा. और आखिर में सरकार को पीछे हटना पड़ा.
सुरक्षा को लेकर क्या चिंता थी?
स्मार्टफोन कंपनियों ने साफ कहा था कि इससे डिवाइस की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. खासकर डेटा और प्राइवेसी को लेकर सवाल उठे थे. Apple और Samsung ने भी इन चिंताओं को उठाया था. उनका कहना था कि जबरन किसी ऐप को जोड़ना सही नहीं है. इससे यूजर की पसंद भी प्रभावित होती है. और सिस्टम की स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है.
लागत और मैन्युफैक्चरिंग पर असर?
कंपनियों ने यह भी कहा कि इस नियम से उत्पादन लागत बढ़ेगी. उन्हें भारत और दूसरे देशों के लिए अलग-अलग फोन बनाने पड़ते. इससे मैन्युफैक्चरिंग लाइन जटिल हो जाती. और खर्च भी बढ़ता. ऐसे में यह प्रस्ताव उनके लिए नुकसान का सौदा बन सकता था. यही वजह है कि उन्होंने इसे सख्ती से खारिज किया. और लगातार सरकार से इसे वापस लेने की मांग की.
आधार ऐप कितना अहम है?
आधार भारत की पहचान व्यवस्था का बड़ा हिस्सा है. यह 12 अंकों का यूनिक नंबर होता है. इसमें फिंगरप्रिंट और आईरिस जैसी जानकारी जुड़ी होती है. देश के करोड़ों लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. बैंकिंग से लेकर एयरपोर्ट तक इसका उपयोग होता है. लेकिन अब यह यूजर की मर्जी पर होगा कि वह ऐप डाउनलोड करे या नहीं. सरकार ने साफ कर दिया है कि मजबूरी नहीं होगी. यही इस फैसले का सबसे बड़ा संदेश है.

























