अमेरिका में एक बड़ा दावा सामने आया है। कहा गया कि व्हाइट हाउस में बैठक चल रही थी। उसी दौरान ट्रंप ने परमाणु कोड की मांग की। माहौल अचानक बदल गया। अधिकारियों में हलचल बढ़ गई। मामला गंभीर हो गया। यह खबर तेजी से फैल गई।
क्या किसने किया यह दावा
यह दावा सीआईए के पूर्व अधिकारी लैरी जॉनसन ने किया। उन्होंने एक इंटरव्यू में यह बात कही। उनके अनुसार बैठक सिचुएशन रूम में थी। ट्रंप ने कोड तक पहुंचने की कोशिश की। तभी एक जनरल ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद बहस बढ़ गई।
क्या बैठक में क्या हुआ
बताया गया कि जनरल डैन केन ने ट्रंप को रोका। उन्होंने साफ मना कर दिया। इसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। दोनों के बीच बहस हुई। स्थिति बिगड़ती चली गई। आखिर में ट्रंप को बाहर भेजा गया। यह घटना चर्चा में आ गई।
क्या व्हाइट हाउस ने क्या कहा
व्हाइट हाउस ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया। अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। इस वजह से मामला और उलझ गया। लोग सच्चाई जानना चाहते हैं। सवाल लगातार उठ रहे हैं। यह मुद्दा राजनीतिक बन गया है। अमेरिका में परमाणु हथियार का अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है। वह सेना के कमांडर इन चीफ होते हैं। अंतिम फैसला वही लेते हैं। हालांकि वह सलाह भी लेते हैं। कई बड़े अधिकारी इसमें शामिल होते हैं। यह प्रक्रिया बेहद गोपनीय होती है।
क्या न्यूक्लियर कोड कैसे रखा जाता
न्यूक्लियर कोड एक खास बैग में रखा जाता है। इसे न्यूक्लियर फुटबॉल कहा जाता है। यह हमेशा राष्ट्रपति के साथ रहता है। इसमें जरूरी कोड और दस्तावेज होते हैं। एक अधिकारी इसे संभालता है। यह सुरक्षा का अहम हिस्सा है। परमाणु हमला करना आसान फैसला नहीं होता। कोड पहले कमांड सेंटर भेजा जाता है। वहां इसकी जांच होती है। पूरी प्रक्रिया बहुत तेज होती है। कुछ ही मिनट में फैसला लेना पड़ता है। इस पर पहले भी सवाल उठे हैं। यह बेहद संवेदनशील मामला है।

























