आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। राघव चड्ढा भाजपा में शामिल हो गए हैं। उनके साथ कई राज्यसभा सांसद भी गए। इससे केजरीवाल की राजनीति पर असर साफ दिख रहा है।
क्या ‘आप’ में आई बड़ी दरार
आम आदमी पार्टी के भीतर बड़ा बदलाव हुआ है। राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ दी। उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। यह फैसला अचानक नहीं था। पिछले कुछ समय से दूरी बढ़ रही थी। अब यह खुलकर सामने आ गया। इससे पार्टी को झटका लगा है।
क्या चड्ढा का सबसे बड़ा सियासी फैसला
राघव चड्ढा का यह अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। उन्होंने अपने साथ कई सांसदों को भी जोड़ा। कुल सात राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हुए। इससे समीकरण बदल गए हैं। संसद में पार्टी की ताकत घट गई। अब आप के पास सिर्फ तीन सांसद बचे हैं।
क्या संविधान के तहत हुआ विलय
चड्ढा ने कहा कि यह कदम नियमों के तहत लिया गया। उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची का जिक्र किया। दो-तिहाई बहुमत होने का दावा किया। इससे अयोग्यता का खतरा नहीं रहेगा। यह प्रक्रिया कानूनी रूप से सही बताई गई। इसी आधार पर यह फैसला लिया गया।
क्या ‘गलत पार्टी में सही आदमी’ बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में चड्ढा भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि वह सही आदमी हैं लेकिन गलत पार्टी में थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी बदल गई है। अब सिद्धांतों से दूर हो गई है। व्यक्तिगत फायदे की राजनीति हो रही है। यह बयान काफी चर्चा में है।
क्या पहले से बढ़ रही थी दूरी
चड्ढा ने बताया कि वह लंबे समय से दूरी बना रहे थे। उन्हें उपनेता पद से हटाया गया था। यह एक बड़ा संकेत था। इसके बाद रिश्ते और बिगड़े। उन्होंने कहा कि वह गलत चीजों का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। यही कारण था कि उन्होंने अलग रास्ता चुना।
क्या आप नेताओं ने किया पलटवार
आप नेताओं ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाए। भगवंत मान ने भी निशाना साधा। आतिशी ने भी आरोप लगाए। कहा गया कि चड्ढा समझौता कर चुके थे। हालांकि चड्ढा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। विवाद और गहरा हो गया।
क्या ‘ऑपरेशन लोटस’ बना मुद्दा
आप ने इस पूरे घटनाक्रम को ऑपरेशन लोटस बताया। आरोप लगाया कि दबाव बनाया गया। ईडी और सीबीआई का नाम लिया गया। कहा गया कि यह सियासी रणनीति है। भाजपा ने इन आरोपों को नकार दिया। अब पंजाब चुनाव से पहले यह बड़ा मुद्दा बन गया है।
























