क्राइम न्यूज. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) की पूरी राज्य इकाई को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया। इसके साथ ही जिला और ब्लॉक इकाइयों को भी भंग कर दिया गया।
ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष ने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की पूरी राज्य इकाई, जिला अध्यक्षों और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को तत्काल प्रभाव से भंग करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।”
कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश में पीसीसी, जिला अध्यक्षों और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को भंग कर दिया। इस निर्णय को कांग्रेस के हिमाचल इकाई में नए सिरे से संगठनात्मक संरचना लाने की योजना के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब हिमाचल प्रदेश उन तीन राज्यों में से एक है, जहां कांग्रेस का मुख्यमंत्री है।
संगठनात्मक बदलाव की वजहें
हिमाचल में सत्ता में आने के बाद से कांग्रेस इकाई में अब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ था। हालांकि, अब राज्य में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही थी। यह कदम कांग्रेस के प्रदेश संगठन में फैले गुटबाज़ी को खत्म करने और एकजुटता लाने की कोशिश माना जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, जो हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी हैं, वर्तमान में कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य हैं। यह समिति पार्टी की सबसे उच्च निर्णय लेने वाली इकाई है। प्रतिभा सिंह को अप्रैल 2022 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
गुटबाज़ी बनी बड़ी चुनौती
हिमाचल कांग्रेस में गुटबाज़ी कोई नई बात नहीं है। फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान यह समस्या खुलकर सामने आई थी। कांग्रेस के उम्मीदवार अभिषेक सिंघवी, भाजपा के हर्ष महाजन से चुनाव हार गए थे। कई कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग करते हुए पार्टी के खिलाफ बगावत की थी, जिससे आंतरिक कलह का साफ संकेत मिला। दिलचस्प यह है कि हर्ष महाजन, जो भाजपा में शामिल हो चुके हैं, पहले कांग्रेस के हिमाचल इकाई में कार्यकारी अध्यक्ष थे।
नए अध्यक्ष की तलाश
हिमाचल प्रदेश में नए कांग्रेस अध्यक्ष के चयन के लिए कई नाम सामने आ रहे हैं। इनमें अनिरुद्ध सिंह और हर्षवर्धन चौहान प्रमुख दावेदार बताए जा रहे हैं। पार्टी के भीतर और बाहर इन नामों को लेकर चर्चा जोरों पर है। इस बड़े फेरबदल के जरिए कांग्रेस हिमाचल प्रदेश में एक नई शुरुआत करने की कोशिश में है, जिससे पार्टी की अंदरूनी कमजोरियों को दूर किया जा सके।

























