बिजनेस न्यूज. भारतीय इंश्योरटेक सेक्टर ने हाल के वर्षों में 2.5 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश जुटाया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस उद्योग में आने वाले समय में अधिक निवेश आकर्षित करने की संभावना है क्योंकि इसमें विकास की अपार संभावनाएं हैं। Boston Consulting Group (BCG) और India InsurTech Association (IIA) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लगभग 150 इंश्योरटेक कंपनियां हैं। इनमें से 10 कंपनियां यूनिकॉर्न और “सूनिकॉर्न” हैं, जबकि 45 “मिनिकॉर्न” कंपनियां हैं। पिछले पांच वर्षों में, इनका राजस्व 12 गुना बढ़कर 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है।
फंडिंग और वैल्यूएशन
कुल निवेश 2.5 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर चुका है, जिससे इस पूरे इकोसिस्टम का मूल्यांकन 13.6 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है। वैश्विक स्तर पर इंश्योरटेक में फंडिंग धीमी हो रही है, लेकिन एशिया-पैसिफिक (APAC) क्षेत्र में यह उद्योग मजबूती बनाए हुए है।
प्रमुख फोकस एरिया
भारतीय इंश्योरटेक कंपनियां मुख्य रूप से मांग और वितरण पर केंद्रित हैं। 80% से अधिक फंडिंग इन्हीं क्षेत्रों में हो रही है। हालांकि, अंडरराइटिंग, क्लेम्स और सर्विसिंग में नवाचार के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं। बीसीजी की मैनेजिंग डायरेक्टर और रिपोर्ट की सह-लेखिका पल्लवी मलानी के अनुसार, “डेटा और तकनीक का उपयोग कर अंडरराइटिंग और क्लेम्स में सुधार किया जा सकता है, जिससे इंश्योरेंस उद्योग में सतत विकास होगा।”
स्वास्थ्य बीमा में प्राथमिकता
भारत ने इंश्योरेंस सेक्टर में काफी प्रगति की है, लेकिन स्वास्थ्य बीमा में अधिकतम कवरेज सुनिश्चित करना अभी भी प्राथमिकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 45% चिकित्सा खर्च अब भी व्यक्तिगत तौर पर किया जाता है। 2047 तक सभी नागरिकों को 100% बीमा कवरेज देने और व्यक्तिगत चिकित्सा खर्च को 10% से कम करने का लक्ष्य है।
भविष्य की योजना
भारत का लक्ष्य 2047 तक दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इंश्योरेंस बाजार बनने का है। इसमें 10 से अधिक कंपनियां वैश्विक शीर्ष 50 में और 100 से अधिक इंश्योरटेक कंपनियां प्रमुख स्तर पर काम कर रही होंगी।

























