पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक बेहद गंभीर मामले पर सख्त रुख दिखाया है। अदालत ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह मामला श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पवित्र स्वरूपों के गायब होने से जुड़ा है। अदालत का कहना है कि जब बार-बार शिकायतें और नोटिस दिए गए थे, तब भी अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की।यह पूरा विवाद 2020 की एक जांच रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रबंधन में गंभीर लापरवाही सामने आई थी। 20 याचिकाकर्ताओं ने नवंबर 2024 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को ज्ञापन सौंपा था। लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बाद में याचिकाकर्ताओं ने पंजाब के मुख्य सचिव को आवेदन, रिमाइंडर और यहां तक कि कानूनी नोटिस भी दिया, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।
सरकार की दलील और आपत्तियां
7 अगस्त, 2025 को पहली सुनवाई में, सरकार ने अदालत को बताया कि सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1925 के तहत उपाय मौजूद हैं। याचिकाकर्ताओं ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उनके आरटीआई और अन्य आवेदनों को केवल एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भेजा गया, लेकिन वास्तविक कार्रवाई नहीं हुई। अदालत ने इस उदासीनता पर सख्त आपत्ति जताई और कहा कि अगर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तो उसे समय पर पूरा करना अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है।
अधिकारियों की चुप्पी पर नाराज़गी
हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अधिकारियों ने याचिकाकर्ताओं के कानूनी नोटिस का कोई जवाब दाखिल नहीं किया। यह रवैया न केवल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि इससे याचिकाकर्ताओं का भरोसा भी टूटा है। इसी आधार पर अदालत ने पंजाब के डीजीपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया और स्पष्ट किया कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अगली सुनवाई और सिख भावनाएं
मामले को अब 16 दिसंबर, 2025 को नए सिरे से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार की यह लापरवाही न सिर्फ सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करती है, बल्कि गुरु ग्रंथ साहिब जी की गरिमा की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल उठाती है। अदालत से अब यह उम्मीद की जा रही है कि वह मामले को अंतिम अंजाम तक पहुंचाएगी और दोषियों की जिम्मेदारी तय करेगी।

























