International News: गाजा युद्ध को आज पूरे दो साल हो गए हैं और संयुक्त राष्ट्र ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में बेहद डरावनी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक गाजा की 80% इमारतें पूरी तरह से तबाह हो चुकी हैं। अब वहां 5.1 करोड़ टन मलबा पड़ा है जिसे हटाने में ही 10 साल लग जाएंगे। सबसे बड़ी समस्या यह है कि मलबा हटाने के लिए मशीनों और साधनों की पहुंच बहुत मुश्किल है। युद्ध ने गाजा को मलबे का शहर बना दिया है और लोग बुनियादी ज़रूरतों के लिए तरस रहे हैं। इस तबाही की कीमत पीढ़ियों तक चुकानी पड़ेगी।
रिपोर्ट बताती है कि गाजा की जमीन पूरी तरह खराब हो चुकी है। बम और मिसाइलों के धमाकों से मिट्टी में खतरनाक केमिकल घुल गए हैं। खेती योग्य जमीन लगभग बर्बाद हो चुकी है। 1500 एकड़ खेतों में से सिर्फ 232 एकड़ ही खेती लायक बची है। यानी 98.5% जमीन अब काम की नहीं है। उपजाऊ जमीन को फिर से खेती योग्य बनाने में करीब 25 साल लगेंगे। पहले गाजा फलों और सब्ज़ियों का बड़ा निर्यातक था, लेकिन अब वहां भूख का संकट मंडरा रहा है।
गाजा में भुखमरी की हालत बेहद खराब है
90% आबादी बेघर हो चुकी है और 80% लोग भूख से जूझ रहे हैं। जो लोग पहले स्ट्रॉबेरी, टमाटर और खीरे जैसी फसलें निर्यात करते थे, आज उनके पास खाने को अनाज नहीं है। गाजा की मिट्टी कभी अपनी उपजाऊ ताकत के लिए मशहूर थी। लेकिन अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग पेट भरने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद का इंतजार कर रहे हैं। इसने गाजा की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बुरी तरह हिला दिया है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी भारी असर पड़ा है
94% अस्पताल और 90% स्कूल पूरी तरह तबाह हो गए हैं। पहले जहां 36 अस्पताल काम कर रहे थे, अब गिने-चुने ही बचे हैं। 83% सिंचाई के कुएं भी बंद हो चुके हैं। पानी और मिट्टी दोनों में ज़हरीले तत्वों की मात्रा तीन गुना बढ़ गई है। गाजा के लोग इलाज और शिक्षा दोनों से वंचित हो चुके हैं। बच्चों और बुज़ुर्गों की हालत सबसे ज़्यादा खराब है क्योंकि उनके पास न दवा है न स्कूल।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि गाजा में तबाही
की आर्थिक कीमत भी बहुत बड़ी है। अब तक का नुकसान करीब 4.5 ट्रिलियन डॉलर यानी 373.5 लाख करोड़ रुपये है। इतने बड़े नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। गाजा में दो साल में इमारतें, सड़कें और पुल सब खत्म हो गए हैं। अब वहां रहना बेहद मुश्किल हो गया है। शहर की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। गाजा का आधे से ज्यादा इलाका मिलिट्री ज़ोन घोषित हो चुका है और आम लोगों की पहुंच वहां नामुमकिन है।
मानव जीवन की कीमत भी बेहद भारी रही है
अब तक 66,158 फिलिस्तीनी मारे गए हैं जिनमें 18,430 बच्चे भी शामिल हैं। लाखों लोग अपने परिजनों को खो चुके हैं। 39,384 बच्चों ने अपने माता-पिता में से किसी एक को खोया है। दूसरी ओर, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में 1200 इजराइली मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इस संघर्ष की वजह से दोनों ओर की मानवता कराह रही है। पीड़ा और तबाही का यह सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।
रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है कि गाजा को फिर से खड़ा करने में दशकों लगेंगे। मलबा हटाने में ही 10 साल और जमीन को खेती लायक बनाने में 25 साल लगेंगे। यह सिर्फ एक युद्ध नहीं बल्कि पूरी पीढ़ियों के भविष्य को अंधकार में धकेलने वाला संकट है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय सहयोग और स्थायी शांति नहीं मिलेगी, गाजा की तस्वीर बेहतर होना असंभव है। फिलहाल, गाजा की ज़िंदगी सिर्फ उम्मीद और प्रार्थना के सहारे चल रही है।

























