दिल्ली से देहरादून जाने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। नई एक्सप्रेसवे से सफर तेज होगा। समय बचेगा। जाम घटेगा। रास्ता आसान होगा। इसका फायदा आम लोगों और कारोबार दोनों को मिलेगा।
क्या सच में समय घटा?
दिल्ली से देहरादून का सफर अब पहले जैसा लंबा और थकाने वाला नहीं रहेगा। नई दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर शुरू होने के बाद यात्रा का समय काफी कम हो गया है। पहले इस रास्ते में छह घंटे या उससे भी ज्यादा समय लग जाता था। अब दावा है कि यही सफर करीब ढाई घंटे में पूरा हो सकेगा। यह बदलाव सिर्फ दूरी का नहीं है। यह लोगों की रोज की परेशानी कम करने वाला कदम भी है। खास बात यह है कि इससे सड़क यात्रा पहले से ज्यादा आसान और सीधी हो जाएगी।
क्या सड़क इतनी लंबी है?
यह एक्सप्रेसवे करीब 213 किलोमीटर लंबी बताई जा रही है। इसे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई ने तैयार कराया है। इस पूरी परियोजना पर 12,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुआ है। सड़क को छह लेन में बनाया गया है ताकि ट्रैफिक तेजी से चल सके। यह कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से होकर गुजरता है। इसलिए इसका असर सिर्फ एक शहर या एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा। यह उत्तर भारत की अहम कनेक्टिविटी परियोजनाओं में गिनी जा रही है।
क्या शुरुआत अक्षरधाम से है?
इस एक्सप्रेसवे की शुरुआत दिल्ली के अक्षरधाम इलाके के पास से मानी जा रही है। इसके बाद यह कई अहम शहरों और कस्बों से होकर आगे बढ़ती है। रास्ते में बागपत, बड़ौत, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर जैसे इलाके पड़ते हैं। फिर यह देहरादून की तरफ पहुंचती है। बीच के लोगों की सुविधा के लिए कई एंट्री और एग्जिट प्वाइंट भी बनाए गए हैं। इनमें लोनी, खेकड़ा, सहारनपुर, गणेशपुर और आशारोड़ी जैसे स्थान शामिल हैं। इससे बीच के शहरों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
क्या आम लोगों को राहत?
इस सड़क का सबसे बड़ा फायदा आम यात्रियों को होगा। जो लोग काम, पढ़ाई, कारोबार या इलाज के लिए सफर करते हैं, उनका समय बचेगा। लंबे जाम और टूटे हुए रूट की परेशानी कम होगी। पर्यटकों के लिए देहरादून और उत्तराखंड तक पहुंचना आसान होगा। ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी इससे मदद मिलेगी क्योंकि माल की आवाजाही तेज हो सकेगी। समय बचेगा तो ईंधन की खपत पर भी असर पड़ेगा। यानी यह सड़क सिर्फ रफ्तार नहीं देगी, बल्कि रोजमर्रा की यात्रा को भी थोड़ा सस्ता और आसान बना सकती है।
क्या जंगल का भी ख्याल?
इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें वन्यजीवों की सुरक्षा को भी अहम जगह दी गई है। एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा राजाजी नेशनल पार्क के पास से गुजरता है। यह इलाका हाथियों, हिरणों और दूसरे जानवरों के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में जानवरों की सुरक्षित आवाजाही के लिए खास ढांचा बनाया गया है। यहां करीब 12 किलोमीटर लंबा ऊंचा वन्यजीव कॉरिडोर तैयार किया गया है। इसे एशिया के बड़े वन्यजीव कॉरिडोर में गिना जा रहा है। इसका मकसद साफ है, सड़क भी चले और जंगल की जिंदगी भी बची रहे।
क्या जानवर सुरक्षित गुजरेंगे यहां?
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए इस हिस्से में कई खास इंतजाम किए गए हैं। चौड़े पिलर लगाए गए हैं ताकि नीचे से जानवर आसानी से निकल सकें। सड़क को ऊंचाई पर रखा गया है। अंडरपास भी बनाए गए हैं। शोर कम करने के लिए साउंड बैरियर लगाए गए हैं। रात में रोशनी का स्तर भी ऐसा रखा गया है कि जानवर परेशान न हों। इस तरह की योजना बताती है कि अब सड़क परियोजनाओं में पर्यावरण को नजरअंदाज करना आसान नहीं रहा। विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश साफ दिखती है।
क्या बदलेगी उत्तर भारत तस्वीर?
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को सिर्फ एक सड़क परियोजना मानना ठीक नहीं होगा। यह उत्तर भारत की बदलती विकास सोच का संकेत भी है। जब राजधानी से पहाड़ तक पहुंच आसान होती है, तो पर्यटन बढ़ता है। व्यापार में तेजी आती है। बीच के शहरों में नई हलचल पैदा होती है। देहरादून, हरिद्वार और आसपास के इलाकों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है। वीकेंड यात्रा बढ़ सकती है। निवेश की संभावना भी मजबूत हो सकती है। साफ है कि यह एक्सप्रेसवे सिर्फ रास्ता नहीं, बल्कि रफ्तार, राहत और नए मौके की कहानी बन सकती है।
























