आम आदमी ने उन सांसदों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है जिन्होंने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है और पार्टी का आरोप है कि यह सिर्फ दल बदल नहीं बल्कि लोकतंत्र और जनता के साथ धोखा है और इसी को लेकर अब कानूनी लड़ाई शुरू कर दी गई है।
क्यों भेजी गई याचिका?
संजय सिंह ने कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत दलबदल करने वाले सांसदों की सदस्यता खत्म होनी चाहिए और इसी नियम के आधार पर राज्यसभा सभापति को याचिका भेजी गई है और इसमें मांग की गई है कि सातों सांसदों को तुरंत अयोग्य घोषित किया जाए।
क्या कहते हैं कानून के जानकार?
पार्टी का दावा है कि कई वरिष्ठ वकीलों और संविधान विशेषज्ञों ने भी यही राय दी है कि इन सांसदों की सदस्यता जानी तय है और उनका मानना है कि दलबदल विरोधी कानून के तहत इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि लोकतंत्र मजबूत बना रहे।
बीजेपी पर क्या आरोप लगे?
संजय सिंह ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्ष के नेताओं पर दबाव बनाया जाता है और फिर उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर लिया जाता है और उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है।
पंजाब में क्या है माहौल?
पार्टी का कहना है कि पंजाब में इन सांसदों के खिलाफ भारी नाराजगी है और लोग इसे गद्दारी मान रहे हैं और कई जगह विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं और जनता खुलकर इन नेताओं के खिलाफ आवाज उठा रही है जिससे सियासी माहौल और गर्म हो गया है।
क्या होगा आगे?
अब सबकी नजर राज्यसभा सभापति के फैसले पर टिकी है कि वह इस याचिका पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या सातों सांसदों की सदस्यता खत्म होती है या नहीं और आने वाले दिनों में यह मामला और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
क्या लंबी चलेगी कानूनी लड़ाई?
संजय सिंह ने साफ कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो पार्टी इस मामले को अदालत तक ले जाएगी और पूरी कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी और उनका कहना है कि संविधान के खिलाफ कोई भी कदम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और न्याय के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रहेगा।
























