सरकार ने साफ कहा है कि यह सिर्फ कानून नहीं है। यह देश के भविष्य का फैसला है। महिलाओं को बराबरी का हक देना जरूरी बताया गया है। अब तक उनकी भागीदारी कम रही है। इस बिल से राजनीति में उनकी हिस्सेदारी बढ़ेगी। फैसलों में उनका असर दिखेगा। यह बदलाव लंबे समय से इंतजार में था।
पीएम मोदी ने क्या संदेश दिया?
प्रधानमंत्री ने बहस की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने विपक्ष पर सीधा हमला किया। कहा कि कुछ दल डर के कारण समर्थन नहीं कर रहे हैं। यह बयान सदन में गूंज गया। उन्होंने दोहरी राजनीति पर भी सवाल उठाए। कहा कि निजी में समर्थन और बाहर विरोध ठीक नहीं।
क्या विपक्ष पूरी तरह खिलाफ है?
विपक्ष ने कई सवाल उठाए हैं। कुछ दल बिल का समर्थन कर रहे हैं। लेकिन कुछ शर्तों की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि लागू करने की प्रक्रिया साफ होनी चाहिए। सीटों के बंटवारे पर भी सवाल हैं। यही वजह है कि बहस लंबी खिंच रही है। सियासी माहौल गर्म हो गया है।
क्या पास करने के लिए नंबर पूरे?
इस बिल को पास करने के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए। यह आसान नहीं है। NDA के पास फिलहाल पूरा आंकड़ा नहीं है। ऐसे में विपक्ष का साथ जरूरी हो जाता है। यही इस बिल की सबसे बड़ी चुनौती है। आने वाले दिनों में जोड़तोड़ तेज होगी। हर वोट की कीमत बढ़ जाएगी।
क्या बढ़ेंगी लोकसभा सीटें?
इस बिल के साथ सीट बढ़ाने की चर्चा भी है। मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाने का प्रस्ताव है। संख्या 850 तक जा सकती है। इसके लिए परिसीमन की जरूरत होगी। इससे कई राज्यों की ताकत बदल सकती है। चुनावी नक्शा पूरी तरह बदल सकता है। यह बड़ा राजनीतिक फैसला होगा।
परिसीमन आयोग क्या करेगा?
सरकार परिसीमन आयोग बनाने की तैयारी में है। यह आयोग नई सीटों का बंटवारा तय करेगा। राज्यों की जनसंख्या के आधार पर फैसला होगा। इससे कुछ राज्यों को फायदा मिल सकता है। कुछ राज्यों की ताकत कम हो सकती है। यह प्रक्रिया संवेदनशील मानी जाती है।
क्या आने वाले समय में बदलेगी सियासत?
इस बिल का असर बड़ा हो सकता है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी तो राजनीति का स्वर बदल सकता है। नए मुद्दे सामने आ सकते हैं। सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है। विपक्ष इसे अधूरा बता रहा है। आने वाले समय में तस्वीर साफ होगी।
























