लोकसभा में शुक्रवार शाम बड़ा फैसला हुआ. महिला आरक्षण संशोधन बिल गिर गया. यह 131वां संविधान संशोधन विधेयक था. इस पर दो दिन तक बहस चली. फिर वोटिंग हुई. नतीजा चौंकाने वाला रहा. पक्ष में 298 वोट पड़े. विरोध में 230 वोट आए. कुल 489 सांसदों ने हिस्सा लिया. लेकिन यह आंकड़ा काफी नहीं था. बिल पास नहीं हो सका. सदन में सन्नाटा सा छा गया.
क्या जरूरी आंकड़ा कितना था?
यह साधारण बिल नहीं था. यह संविधान संशोधन था. ऐसे बिल के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए. यानी मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों का बड़ा हिस्सा. कुल 489 सांसदों के हिसाब से 326 वोट जरूरी थे. लेकिन समर्थन में सिर्फ 298 वोट आए. यानी 28 वोट कम पड़ गए. यही कमी भारी पड़ी. बिल गिर गया. सरकार के लिए यह बड़ा झटका बना.
क्या बहस में कौन-कौन शामिल हुआ?
इस बिल पर लंबी बहस हुई. करीब 21 घंटे चर्चा चली. 130 सांसदों ने अपनी बात रखी. इनमें 56 महिला सांसद भी थीं. बहस के दौरान कई मुद्दे उठे. कुछ ने समर्थन किया. कुछ ने सवाल उठाए. माहौल कई बार गरम हुआ. सत्ता पक्ष और विपक्ष भिड़ते दिखे. हर कोई अपनी लाइन पर अड़ा रहा. यही टकराव अंत तक दिखा.
क्या अमित शाह ने क्या कहा?
बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने विपक्ष पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष साथ नहीं देगा तो बिल पास नहीं होगा. उन्होंने यह भी कहा कि देश की महिलाएं सब देख रही हैं. कौन उनके हक में है. कौन नहीं. यह बात रिकॉर्ड में दर्ज हो रही है. उनके बयान पर सदन में हंगामा भी हुआ.
क्या आगे के बिलों पर क्या असर?
इस नतीजे के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लिया. संसदीय कार्य राज्य मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि बाकी दो बिलों पर चर्चा नहीं होगी. इनमें परिसीमन और संघ राज्य कानून संशोधन शामिल थे. सरकार ने फिलहाल इन्हें रोक दिया. इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई. अध्यक्ष Om Birla ने बैठक खत्म कर दी.
क्या इस बिल में क्या प्रावधान थे?
इस बिल में बड़ा बदलाव प्रस्तावित था. महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात थी. लोकसभा सीटें बढ़ाने का भी प्लान था. 543 से बढ़ाकर 850 तक करने का प्रस्ताव था. यह सब परिसीमन के बाद लागू होना था. लक्ष्य था 2029 चुनाव से पहले इसे लागू करना. राज्यों की विधानसभाओं में भी यही मॉडल लागू करना था. लेकिन अब यह सब अटक गया.
क्या अब आगे क्या होगा?
अब सवाल बड़ा है. क्या यह बिल फिर आएगा. सरकार ने कहा है कि वह महिलाओं के हक के लिए प्रतिबद्ध है. लेकिन विपक्ष की भूमिका अहम रहेगी. बिना सहयोग के ऐसा बिल पास नहीं हो सकता. आने वाले दिनों में इस पर राजनीति और तेज होगी. महिलाओं की नजर अब संसद पर टिकी है. फैसला कब होगा, यही सबसे बड़ा सवाल है.
























