लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संशोधन बिल पास नहीं हो सका. इसके लिए जरूरी 352 वोट चाहिए थे, लेकिन सरकार के पक्ष में केवल 298 वोट आए. 54 वोटों की कमी ने पूरे समीकरण को बदल दिया. यह सिर्फ एक संख्या नहीं थी. यह उस उम्मीद का झटका था, जो इस बिल से जुड़ी थी. संसद के भीतर माहौल अचानक बदल गया. बहस से लेकर वोटिंग तक हर पल में तनाव साफ दिखा. नतीजा आया तो सरकार के खेमे में मायूसी नजर आई.
पीएम मोदी ने क्या कहा?
बिल गिरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया. उनका लहजा सीधा और आक्रामक था. उन्होंने विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया. कहा कि स्वार्थ की राजनीति ने महिलाओं का हक रोक दिया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि देश की नारी शक्ति सब देख रही है. यह अपमान वह नहीं भूलेगी. पीएम ने यह भी जोड़ा कि यह सिर्फ एक बिल नहीं था. यह महिलाओं के सपनों का सवाल था.
सरकार की कोशिश कितनी थी?
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने पूरी ताकत लगाई. हर स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिश हुई. लेकिन संख्या बल साथ नहीं आया. उन्होंने यह भी कहा कि हार मानने का सवाल नहीं है. सरकार आगे भी इस दिशा में काम करती रहेगी. उनके मुताबिक यह लड़ाई लंबी है. और यह रुकने वाली नहीं है. उन्होंने भरोसा दिया कि हर रुकावट को दूर किया जाएगा.
विपक्ष पर क्या आरोप लगे?
पीएम मोदी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि ये दल हर बड़े फैसले में अड़ंगा लगाते हैं. जनधन योजना से लेकर जीएसटी तक का जिक्र किया. तीन तलाक कानून और आर्टिकल 370 भी गिनाए. उन्होंने कहा कि हर सुधार के वक्त विपक्ष ने विरोध किया. और इस बार भी वही हुआ. उनके मुताबिक यह राजनीति देश के हित में नहीं है.
परिसीमन पर क्या सफाई दी?
प्रधानमंत्री ने परिसीमन को लेकर फैल रही आशंकाओं पर भी बात की. उन्होंने कहा कि इसमें किसी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा. सीटों की संख्या सभी राज्यों में समान अनुपात में बढ़ेगी. उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर भ्रम फैला रहा है. लोगों को गुमराह किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि इस मुद्दे को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है.
महिलाओं को लेकर क्या संदेश दिया?
पीएम मोदी ने कहा कि महिलाएं अब हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. पंचायत से लेकर बड़े पदों तक अपनी क्षमता साबित कर चुकी हैं. उन्होंने कहा कि अब समय है कि संसद और विधानसभा में भी उनकी भागीदारी बढ़े. उन्होंने इसे सशक्तिकरण का बड़ा कदम बताया. कहा कि यह महायज्ञ जैसा प्रयास था. लेकिन इसे बीच में रोक दिया गया.
आगे की राजनीति क्या होगी?
अंत में प्रधानमंत्री ने साफ किया कि यह मुद्दा यहीं खत्म नहीं होगा. सरकार फिर कोशिश करेगी. उन्होंने कहा कि महिलाएं इस पूरे घटनाक्रम को याद रखेंगी. चुनावी राजनीति में इसका असर दिख सकता है. विपक्ष पर उन्होंने परिवारवाद और स्वार्थ की राजनीति का आरोप लगाया. संदेश साफ था. यह लड़ाई अभी बाकी है. और आने वाले समय में फिर जोर पकड़ेगी.

























