मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इटली ने बड़ा फैसला लिया है। इजरायल से रक्षा संबंध रोके गए हैं। सरकार ने एग्रीमेंट रिन्यू नहीं किए। यह कदम हालात देखकर उठाया गया है। दुनिया अब इस फैसले को ध्यान से देख रही है।
क्या इटली ने बड़ा कदम उठाया?
इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने इजरायल के साथ रक्षा समझौतों को रोकने का बड़ा फैसला लिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। सरकार ने साफ किया है कि अब पुराने डिफेंस एग्रीमेंट अपने आप रिन्यू नहीं होंगे। यह एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। क्योंकि इटली पहले इजरायल का मजबूत साथी माना जाता था। अब इस फैसले से साफ दिख रहा है कि इटली अपनी नीति में बदलाव कर रहा है।
क्या वजह बनी यह फैसला?
सरकार का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए उठाया गया है। मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ रहा है। कई जगह हालात युद्ध जैसे बनते जा रहे हैं। ऐसे में इटली ने दूरी बनाना बेहतर समझा। हालांकि सरकार ने किसी खास समझौते की जानकारी नहीं दी है। लेकिन संकेत साफ हैं कि अब इटली संतुलन बनाकर चलना चाहता है। यह बदलाव इटली की विदेश नीति में एक नई दिशा दिखाता है।
क्या होर्मुज पर दिया बड़ा बयान?
इटली के शहर Verona में पत्रकारों से बात करते हुए मेलोनी ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इसे पूरी तरह खुला रखना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक यहां किसी तरह की रुकावट पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसे फिर से सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश होनी चाहिए। यह बयान सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार से जुड़ा माना जा रहा है।
क्या होर्मुज इतना अहम है?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में गिना जाता है। यहां से तेल और गैस की बड़ी सप्लाई होती है। मेलोनी ने कहा कि यह सिर्फ ईंधन के लिए नहीं, बल्कि खाद जैसी जरूरी चीजों के लिए भी अहम है। अगर यह रास्ता प्रभावित होता है तो यूरोप समेत पूरी दुनिया पर असर पड़ेगा। तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। सप्लाई चेन पर दबाव आ सकता है। इसलिए इसे खुला रखना जरूरी है।
क्या शांति वार्ता पर जोर?
मेलोनी ने United States और Iran के बीच चल रही बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शांति वार्ता को आगे बढ़ाना जरूरी है। इससे ही हालात सुधर सकते हैं। उन्होंने अपील की कि सभी पक्ष बातचीत का रास्ता अपनाएं। ताकि तनाव कम हो सके। मिडिल ईस्ट में स्थिरता लाना अब सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।
क्या यूरोप की चिंता बढ़ी?
इटली का यह कदम अकेला नहीं माना जा रहा है। यूरोप के कई देश मिडिल ईस्ट के हालात को लेकर चिंतित हैं। अगर तनाव बढ़ता है तो इसका असर सीधे उनकी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। खासकर ऊर्जा सप्लाई पर। इसलिए यूरोपीय देश अब ज्यादा सतर्क नजर आ रहे हैं। मेलोनी का बयान इसी बढ़ती चिंता को दिखाता है।
क्या बदलेंगे वैश्विक हालात?
इटली का यह फैसला सिर्फ एक देश का कदम नहीं है। यह वैश्विक राजनीति में बदलाव का संकेत भी हो सकता है। इजरायल से दूरी और शांति पर जोर यह दिखाता है कि देश अब अपने आर्थिक हितों को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। आने वाले समय में ऐसे और फैसले देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट पर टिकी हैं। क्योंकि यहां का हर फैसला पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है।
























