ईरान ने शुक्रवार को बड़ा ऐलान किया. 49 दिन बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल दिया गया. यह खबर आते ही बाजार में हलचल हुई. तेल और गैस की कीमतें गिरने लगीं. दुनिया भर के निवेशक सक्रिय हुए. ऊर्जा बाजार में राहत दिखी. युद्धविराम के दौरान जहाजों को छूट मिली. अब आवाजाही बिना रुकावट होगी. इससे सप्लाई का रास्ता साफ हुआ. बाजार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी.
क्या तेल-गैस की कीमतें कितनी गिरीं?
घोषणा के बाद कीमतों में तेज गिरावट आई. ब्रेंट क्रूड करीब 8.46 डॉलर टूटा. यह 90.93 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. अमेरिकी WTI क्रूड भी गिरा. यह 8.87 डॉलर टूटकर 85.82 डॉलर पर पहुंचा. यूरोप में गैस कॉन्ट्रैक्ट भी गिरा. करीब 8.5 प्रतिशत की कमी आई. बाजार में राहत की लहर दौड़ी. निवेशकों का भरोसा लौटा.
क्या ईरान और अमेरिका से क्या संकेत मिले?
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने खुलने की पुष्टि की. इसके बाद माहौल बदला. उधर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी बयान दिया. उन्होंने कहा कि समझौता संभव है. युद्ध खत्म हो सकता है. इन संकेतों ने बाजार को भरोसा दिया. तनाव कम होने की उम्मीद बनी.
क्या होर्मुज क्यों इतना अहम है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का अहम रास्ता है. इसे ऊर्जा की लाइफलाइन कहा जाता है. दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल यहीं से गुजरता है. अगर यह बंद होता है तो संकट बढ़ता है. पिछले 49 दिनों में यही हुआ. सप्लाई रुक गई थी. कई देशों पर दबाव बढ़ा. कीमतें ऊपर चली गई थीं.
क्या भारत पर क्या असर पड़ा था?
भारत पर इसका सीधा असर पड़ा. खाड़ी देशों से आने वाला तेल अटक गया. टैंकर समय पर नहीं पहुंचे. सप्लाई में दिक्कत आई. देश में दबाव बढ़ा. कीमतें बढ़ने का डर बना रहा. रसोई गैस और ईंधन को लेकर चिंता बढ़ी. बाजार में अनिश्चितता दिखी. सरकार पर बोझ बढ़ा.
क्या अब भारत को क्या राहत मिलेगी?
अब हालात बदलने की उम्मीद है. होर्मुज खुलने से सप्लाई फिर शुरू होगी. टैंकर बिना रुकावट भारत पहुंचेंगे. आयात आसान होगा. पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रह सकती हैं. थोड़ी कमी भी आ सकती है. गैस सिलेंडर की उपलब्धता सुधरेगी. आम लोगों को राहत मिलेगी.
क्या आगे कीमतें कैसे तय होंगी?
अब सब नजर हालात पर है. अगर शांति बनी रहती है तो फायदा जारी रहेगा. लेकिन तनाव बढ़ा तो असर उल्टा होगा. कीमतें फिर बढ़ सकती हैं. बाजार बहुत संवेदनशील है. हर खबर पर
























