भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है और दोनों देश फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं जो आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देगा और इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी और नई संभावनाएं खुलेंगी।
भारतीय कंपनियों को क्या फायदा?
इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारतीय कंपनियों को मिलेगा क्योंकि अब उन्हें न्यूजीलैंड के बाजार में बिना अतिरिक्त शुल्क के प्रवेश मिल सकेगा और इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ओशिनिया क्षेत्र में भारत की पकड़ मजबूत होगी और निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी।
निवेश और रोजगार कैसे बढ़ेंगे?
इस डील के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में करीब 20 अरब डॉलर के विदेशी निवेश आने की उम्मीद है और इसके साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और भारतीय पेशेवरों के लिए वीजा नियम आसान होंगे जिससे विदेश में काम करने के मौके बढ़ेंगे और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
किन सेक्टर को मिलेगा सीधा फायदा?
फार्मा और मेडिकल उपकरण जैसे सेक्टर को इस समझौते से सीधा फायदा होगा क्योंकि इन क्षेत्रों में निर्यात से जुड़ी बाधाएं कम होंगी और भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार करने का मौका मिलेगा और इससे हेल्थ सेक्टर की कंपनियों को भी नई ताकत मिलेगी।
टैरिफ में क्या बदलाव होगा?
समझौते के अनुसार न्यूजीलैंड से आने वाले लगभग 95 प्रतिशत उत्पादों पर भारत टैरिफ कम करेगा या खत्म करेगा और इसमें ऊन, कोयला, वाइन और फल जैसे उत्पाद शामिल हैं लेकिन भारत ने अपने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए डेयरी और कृषि से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों को इससे बाहर रखा है।
क्या है दोनों देशों का लक्ष्य?
भारत और न्यूजीलैंड ने अगले पांच वर्षों में आपसी व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है और सरकार का मानना है कि यह समझौता छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी नए अवसर खोलेगा और खासतौर पर निर्यातकों को बड़ा फायदा होगा।
वैश्विक तनाव में कितना अहम कदम?
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है लेकिन ऐसे समय में यह समझौता भारत के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा और निर्यातकों को नया बाजार देगा और इससे भारत की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है।
























